मामी कि गर्म चूत मारी

August 16, 2026 1 min read 36 words

दोस्तो, मेरा नाम अक्षय है और मैं यूपी के एक छोटे से कस्बे का रहने वाला हूं.

मेरी फैमिली में मैं, मेरी ब्यूटिफुल मॉम, मेरी मॉम के पति यानि वर्तमान में मेरे पापा. इनके अलावा रिश्ते में लगने वाला एक मेरा बड़ा भाई है.

मेरे वर्तमान बाप ने दूसरी महिला अमृता से शादी कर ली, इस तरह से मैं एक टाइमपास प्रोडक्ट की तरह अपने ऐसे मां बाप के साथ रहने लगा, जिनके खून का अंश मेरे जिस्म में नहीं था.

इधर जो दूसरी मां यानि अमृता मॉम ने मेरे वर्तमान बाप से शादी की थी, उनका एक बेटा पहले से ही था और चूंकि वह मुझसे उम्र में बड़ा था तो वह मेरा बड़ा भाई बन गया.

मेरी सौतेली मां अमृता मुझे मेरे भाई के बचे हुए खिलौने, उसके पहने हुए कपड़े और उसके द्वारा यूज की गईं चीजें ही देती थीं.

सब मिलाकर मसला यह है कि मेरी आज की सौतेली मॉम मुझे प्यार के नाम पर बहुत कम ही प्यार देती थीं.

मैं बड़ा हो गया था तो यह सब समझने लगा था.

इसी वजह से मेरे मन में मेरी सौतेली मॉम के प्रति गुस्सा भर गया था.

मैं पढ़ने में होशियार हूँ तो नवोदय विद्यालय में मेरा सिलेक्शन हो गया था.

अपने इसी गुस्से को वजह से मैं वहीं चला गया.

वहां हॉस्टल में रह कर पढ़ाई होती थी तो मेरा मन अपनी पढ़ाई में लगने लगा था.

फिर 12 वीं के बाद जब मैं एक बार कुछ दिन के लिए वापस आया, तब भी मेरे साथ वही सब चल रहा था.

मेरी सौतेली मॉम अभी भी मुझे प्यार नहीं करती थीं.

मैं मां के प्यार के लिए तरस रहा था.

फिर मैं ग्रेजुएशन के लिए घर से बाहर चला गया और दिल्ली में रह कर पढ़ाई करने लगा.

वहीं पर बाद में कंप्यूटर साइंस का कोर्स एमसीए करके एक सॉफ्टवेयर डेवलपर बन गया.

इस बीच बहुत बार मुझे घर की याद आती लेकिन बहुत ज्यादा जरूरी होने पर ही मैं एक दो दिन के लिए घर जाता था.

एक बार ऐसा हुआ कि हम सबको किसी शादी में जाना था.

मेरा जाने का मन था लेकिन मैं, मेरी सौतेली मॉम के कहने के कारण गुस्से में नहीं तैयार हुआ और घर से थोड़ी देर के लिए बाहर निकल गया.

जब वापस आया तो मैं अपने रूम में घुस गया.

वहां जो नजारा मुझे देखने को मिला तो मेरे लिए एक बहुत गजब सरप्राइज़ था.

मेरी सौतेली मॉम अमृता पूरी नंगी थीं और टॉवल से अपने बाल सुखा रही थीं.

हालांकि मुझे देखते ही अमृता मॉम ने जल्दी से अपने आप को ढक लिया और मैं भी जल्दी से रूम से बाहर आ गया.

लेकिन वे कुछ पल मेरे लिए जन्नत जैसे ही थे.

अब मेरा नजरिया बदल गया था.

मेरी सौतेली मॉम अमृता सच में बड़ी सॉफ्ट थीं.

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उनके दूध इतने बड़े और निपल्स इतने आकर्षक थे कि बस उनका रस चूसते रहने का मन करने लगा था.

मुझे तो बचपन में भी उनका रस अच्छे से चूसने नहीं मिला था, तो मन में एक कसक जाग गई.

अमृता मॉम की जांघें बड़ी ही मस्त चिकनी चिकनी थीं.

उनकी जांघों के बीच में मस्त सी थोड़ी मैच्योर गुलाबी और जामुनी कलर की चूत थी और वह बहुत ही अट्रैक्टिव चुत थी.

मैंने पहली बार ये नजारा देखा था तो बस अमृता मॉम का प्यार पाने के लिए मैं तड़प उठा.

मेरे मन में आने लगा कि कोई बात नहीं अमृता मॉम का बचपन में प्यार नहीं मिला, तो क्या हुआ … अब जरूर लेकर रहूंगा. मैं अपनी सेक्सी मॉम का प्यार पाकर ही रहूंगा.

अब मैं अमृता मॉम के लिए बहुत ही ज्यादा अच्छा व्यवहार करने लगा, उनका अटेंशन सीकर हो गया.

मैंने अपनी सौतेली मॉम अमृता के साथ बहुत ही अच्छा व्यवहार करना शुरू कर दिया था लेकिन उनको मैं फिर भी पसंद नहीं आया.

उनका व्यवहार मेरे लिए वैसा ही रूखा और सौतेला रहा.

धीरे धीरे मुझे समझ आ गया कि अमृता मॉम मुझसे कभी खुश नहीं होंगी, तो मैंने फिर से घर छोड़ दिया.

अब मैं 2 साल बाहर रहा.

मेरी घर पर बहुत कम बात होती थी.

कभी 2-3 हफ्ते में एक दो मिनट्स को, तो मुझे घर पर क्या चल रहा है … इसका पता नहीं चल पाता था.

इस बीच मेरे भाई की शादी तय हो गई, इसका मुझे कोई पता नहीं चला.

एक दिन आरती मामी की कॉल आई, मेरी मामी भी बड़ी माल हैं.

मामी मुझसे बड़े प्यार से बात करती हैं … अक्षय जी कह कर.

मेरे मन में मामी को पटाने का विचार भी बहुत बार आया था.

मैं तो मामी को हिंट भी दे दिया करता था.

जैसे … मैं बोल देता कि मामी जी इतनी इज्जत से बोलोगी तो मुझे आपसे प्यार हो जाएगा कसम से!

मामी हंस कर बोल देतीं- अच्छा … और प्यार होकर क्या होगा?

मैं बोल देता- प्यार होकर तो बेबी ही होता है!

‘अच्छा जी तुम्हारे मामा से तो हुआ नहीं!’

मैं- क्या … प्यार या बेबी?

मामी- दोनों!

मैं- अरे तो मैं करूंगा ना प्यार भी … और बेबी भी.

मामी- कभी घर आते भी हो?

मैं- इस बार पक्का आ जाऊंगा.

मामी- हुह … अब तो मैं ही आ रही हूं तुम्हारे घर तुम्हारे भाई की शादी में … तब करेंगे मिल कर प्यार भी और बेबी भी!

मैं- क्या? मेरे भाई की शादी … कब?

मामी- लो तुमको ये भी पता नहीं है क्या?

मैं- नहीं तो … कब है ?

मामी- अरे अभी दो हफ्ता बाद ही तो है.

‘अच्छा चलो ठीक है, फिर आओगी तो जम कर प्यार करेंगे!’

मैंने यह बोल कर फोन काट दिया.

उसके तुरंत बाद मैंने भाई से पूछा मैसेज पर, तो उसने बोला कि हां हो गई है तय.

मैंने पूछा- मुझे कब बताने वाले थे?

तो भाई ने बोला- मम्मी ने मना किया था तुझे बताने को … उन्होंने बोला था कि चिट्ठी भेज देना एक दो दिन पहले, तो आ जाएगा.

यह बात सुनते ही अमृता मॉम के लिए मेरी नफरत और भी बहुत ज्यादा बढ़ गई.

चिट्ठी तो आ गई लेकिन मेरा मन नहीं था जाने को, लेकिन मामी को चोदने को मिल रहा था तो मैं चला आया.

शादी वाले दिन से सिर्फ दो दिन पहले ही मामी आई हुई थीं, तो वे मुझे देखते ही खिल उठीं.

मैं जिस दिन पहुंचा, उसी रात को मामी का मैसेज आ गया कि वे रूम में अकेली हैं.

मामा तो पीने गए थे. मैं मौका देख कर पहुंच गया मामी के रूम में.

आरती- बड़ी देर लगा दी अक्षय जी, मामी को प्यार करने का मन नहीं था क्या?

मैं- सिर्फ आपको प्यार करने ही आया हूं, नहीं तो मैं आने भी नहीं वाला था.

‘अच्छा जी पागल समझते हो क्या हमें! मन होता तो एक हफ्ते पहले ही आ गए होते हमें प्यार करने!’

मैंने आरती मामी को गोद में उठा कर कहा- अरे अभी कौन सा देर हो गई है आरती डार्लिंग, इन 2 दिन में तो इतना प्यार कर दूंगा तुमको कि दो बच्चों की मां बन जाओगी!

इतना कह कर मैंने आरती के होंठों को चूमना स्टार्ट कर दिया.

आरती ने भी मेरा भरपूर साथ देना शुरू कर दिया.

हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूम रहे थे, साथ में जीभ से जीभ टकरा रहे थे.

मैंने आरती के कपड़े उतारना स्टार्ट कर दिया.

आरती मॉडर्न थी तो रात को टी-शर्ट लोअर पहन रखा था उसने.

मैंने उसके मीठे मीठे होंठों का रस चूसते हुए उसकी टी-शर्ट उतार कर फेंक दी और उसके मम्मों को हाथों में लेकर दबाने लगा.

आरती मचलने लगी.

उसके मुँह से सिसकारियां फ़ूटने लगीं- सी ई सी ईई आई ई सी सी.

उसकी मादक आवाजों को सुनकर मैं उत्तेजित होने लगा और मैं और जोर से आरती के होंठों को काटने की कोशिश करने लगा, साथ की उसके मम्मों को और जोर से दबाने लगा.

आरती ने भी मेरे ट्रैक में हाथ डालकर मेरे लौड़े को बाहर निकाल लिया.

वह उसे अपने कोमल कोमल हाथों से छेड़ने लगी.

कभी मेरे लंड की स्किन को आगे पीछे करती, जैसे बंदूक को रिलोड कर रही हो, तो कभी उसे शेक करती.

ऐसे करते हुए हम दोनों को 5 मिनट से ज्यादा हो गया था.

अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था.

मैंने आरती के होंठों को अपने होंठों की कैद से आजाद किया और उसको बेड पर पटक दिया.

बेड स्प्रिंग का था, आरती पूरे दो बार उछल कर वापस बेड पर गिर गई.

मैं खुद भी बेड पर कूद गया और आरती को पकड़ कर लगभग घोड़ी के पोज में ले आया.

मैंने झटके से उसका लोअर खींच कर नीचे कर दिया.

अब मैं आरती की प्यारी सी चूत को चाटने लगा.

आरती को मजा आने लगा, वह मुझसे कहने लगी- आह राजा ये नहीं करना चाहिए था तुम्हें … अब पूरा छेद अच्छे से चाटना पड़ेगा. आह मेरी कोमल चूत को चाट कर झाड़ दो आह आह सी सी इस ई ईई.

मैंने बिना कुछ बोले आरती की चूत के जी-स्पॉट को जीभ से चाटना जारी रखा.

कुछ देर चाटने के बाद आरती की चूत में से एक गाढ़ा सा कोई लिक्विड निकलने लगा.

मैंने आरती को वह दिखाते हुए पूछा- तुम झड़ गई हो क्या?

वह बोली- बुद्धू, ये मेरी चूत के गर्म होने की निशानी है. चलो मेले लाजा … अब अच्छे से चोदो मुझे … और अपने जैशे प्याले प्याले दो बच्चे पैदा करने है तुम्हें मेले साथ!

आरती के इतने प्यार से इनवाइट करते ही मैंने अपना लंड आरती की चूत के ऊपर रख कर पूरी ताकत से झटका मारा.

मेरा आधे से ज्यादा लंड आरती की चूत को फैलाकर अपना रास्ता बनाता हुआ घुस गया.

आरती की चूत को इतना मोटा और इतना शक्तिशाली लंड का प्रहार अपनी चूत में पहली बार मिला था तो उसकी हल्की सी चीख निकल गई.

आरती ने रुकने को नहीं बोला तो मैं खुद ही रुक कर पूछने लगा.

वह बोली- अक्षय जी तुम्हारे जैसे मर्द के मर्दाना थपेड़े सहने में थोड़ा तो दर्द होगा ही, तुम रुक क्यों गए? चलो अच्छे से चोदो मुझे!

आरती की बात सुनते ही मैंने फुल स्पीड से उसकी प्यारी सी खाई में अपना घोड़ा दौड़ाना शुरू कर दिया.

आरती की सिसकारियों से कमरा भर गया.

लगभग आधा घंटा बाद आरती पूरी तरह से झड़ गई.

झड़ने के बाद आरती का मन उतर गया था, जैसा कि अक्सर सेक्स के टाइम पर झड़ने के बाद हो ही जाता है.

उसकी चूत से निकले पानी से बेड शीट गीली हो गई थी.

मैंने आरती से कहा- और सेक्स चाहिए?

उसने कहा- अब कल कर लेना, मेरा मन नहीं है अब!

मुझे आरती पर गुस्सा तो बहुत आया लेकिन मैंने सोचा कि कल जब ये फिर से एक्साइटेड होगी तब मैं इसको देख लूंगा.

मैंने कपड़े पहन लिए.

आरती ने पूछा- गुस्सा हो गए क्या?

मैंने अनमने मन से कहा- नहीं!

तो आरती ने मुझसे कहा- यार, कल अच्छे से चोद लेना मुझे, आज मैंने ज्यादा कुछ खाया भी नहीं था और इस टाइम के लिए एनर्जी के लिए भी नहीं रखी थी. कल पक्का रात भर प्यार करेंगे दोनों … प्रोमिस!

मैंने सोचा कि चलो कल ही सही.

मैं बाहर आ गया.

मैं अपने रूम में जाने को था तभी मेरी नजर अमृता मॉम पर पड़ी, जो साड़ी पहन कर माल बनकर घूम रही थीं.

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